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Friday, 28 September 2018

नवरात्रि पूजन विधि – नवरात्रि कैसे मनाए?


हिन्दू के लिए ही नही बल्कि सभी भारतीयों के लिए नवरात्रि के बहुत महत्व है। नवरात्रि के समय मे माँ दुर्गा की आराधना करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है इसलिए सभी भारतीय बहुत हर्षोल्लास के साथ नवरात्रि के पर्व को मानते है।नवरात्रि का बहुत महत्व होने की वजह से सभी इस पर्व को पूर्ण विधि विधान से मनाना चाहते है इसलिए हम नवरात्रि के बारे में सभी जानकारी को विस्तार से समझेंगे।

नवरात्रि क्या है? और नवरात्रि क्यो मनाई जाती है।


नवरात्रि माँ दुर्गा की पूजा अर्चना के लिए मनाई जाती है जिसकी शुरुआत भगवान श्री राम के द्वारा की गई थी।

भारतीय वर्ष में नवरात्रि दो बार शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है।
ऐसा माना जाता है कि भगवाम राम के जन्म दिन के रूप में और उनके द्वारा मा दुर्गा की पूजा की शुरआत के रूप में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है।

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत बहु भगवान श्री राम के द्वारा ही मानी गयी है जब भगवान श्री राम लंका पर चढ़ाई कर रहे थे उसके पहले उनने माँ दुर्गा की पूजा शुरू की थी और यह पूजा 9 दिनों तक चली जिसको शारदीय नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। और रावण वध के दिन दसवे दिन इसका समापन हुआ था। जिसको विजयदासवी के रूप में बनाया जाता है।

नवरात्रि पूजन विधि – नवरात्रि कैसे मनाए?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है और हम ऊपर समझ चुके है कि नवरात्रि की पूजा 9 दिन चलती है और सभी लोग अपने हिसाब से पूजा अर्चना करते है।

यदि आप 9 दिनों 9 देवियो की अलग अलग पूजा कर सकते है तो यह बहुत अच्छी बात है लेकिन यदि आपके पास समय का आभाव है तो आप नवरात्रि के पहले दिन, अष्टमी और नवमी के दिन पूजा करके भी माता की भक्ति करके शांति और पुण्य की प्राप्ति कर सकते है।

नवमी की पूजा 9 दिनों एक समान होती है जिसमे निम्न चरण होते है।

माँ दुर्गा प्रतिमा स्थापना
नवरात्रि की शुरुआत में नवरात्रि के एक दिन पहले से माता रानी के दरबार को बनाने की तैयारी शुरू की जाती है ताकि नवरात्रि के पहले दिन ही दुर्गा माँ की प्रतिमा की स्थापना नवरात्रि के पहले दिन की जा सके।

नवरात्रि के पहले दिन लोगो और पंडित के द्वारा पूजन और मंत्रो के उच्चारण के साथ दुर्गा माँ की प्रतिमा की स्थापना की जाती है।

माता के दरबार में घट रखे जाते है जिनमे गेंहू के बीज बोए जाते है जिनको हम जबारे बोलते है। किसी किसी स्थान पर माता की प्रतिमा के साथ गणेश भगवान और शिव भगवान की प्रतिमाओं की स्थापना भी की जाती है।

माता के दरबार को फूलों और इत्र आदि की खुशबू से महकाया जाता है।

नवरात्रि के पगले दिन से लोग माता के नाम का व्रत रखते है। कुछ सिर्फ नवरात्रि के पहले दिन मतलब बैठकी के दिन ब्रत रखते है और कुछ लोग 9 दिनों के व्रत रखते है।

सुबह की नवरात्रि पूजन विधि

माता की प्रतिमा स्थापना के बाद लोग सुबह सुबह माता के दरबार मे पूजा के लिए जाते है जहाँ लोग जलाभिषेक और पुष्पार्पण करते है और अगरबत्ती, धूप आधी को जलाकर दरबाद को महकते है।
माता के जलाभिषेक और पुष्पार्पण के बाद माता की आरती होती है और आरती के पश्चात प्रसाद के रूप में नारियल और मिठाई आदि का भोग लगाते है।
माता को भोग लगाने के बाद लोगो मे प्रसाद का वितरण किया जाता है जिसके बाद भजन कीर्तन आदि के प्रोग्राम से मा दुर्गा के दरबार को भक्तिमय बनाये रखते है।
संध्या नवरात्रि पूजन विधि
संध्या के समय नवरात्रि में बहित अच्छा लगता है क्योंकि मा दुर्गा का दरबाद रोशनी से भरा होता है चारो तरफ सिर्फ मा के गीतों की आवाज सुनाई देती है।
माता रानी के दरबाद के के आस पास दर्शनार्थियो की भीड़ लगी होती है।
शाम के समय मे लोग मा के दरबार मे जाते है और संध्या आरती करते है और औरते घरसे दीपो को लेकर मा के दरबाद में जलने ले जाती है।
सन्ध्या आरती के बाद प्रसाद का वितरण होता है और सभी लोग जगराते की तैयरी में लग जाते है।
रात भर लोग माँ के दरबार मे भक्ति गीतों को गाकर और जगराते करके भी माँ की भक्ति का आनंद लेते है।
नवरात्रि पंचमी पूजन
नवरात्रि के पहले दिन को बढ़े धूमधाम से मनाने के बेस्ड लोग रोजाना नियमत रूप से पूजन करते है लेकिन नवरात्रि के पांचवे दिन ला लोगो के लिए अधिक महत्व होता है।

नवरात्रि के पांचवे दिन जो लोग 9 दिनों का व्रत नही रखते है वह आज के दिन व्रत रखके माता की भक्ति करते है और माँ की पूजा अर्चना श्रद्धा के साथ करते है।

आज के दिन लोग बिना जल पिये (निर्जल) उपवास भी रखते है।
अष्टमी पूजन
पंचबी के बाद लोग अष्टमी के पूजन को अधिक महत्व देते है और जो लोग 9 दिन का उपवास नही रखते है वह अष्टमी के दिन उपवास रखते है।
अष्टमी के दिन लोगो घर पर मातारानी का विशेष पूजन होता है। लेकिन कुछ लोगो के घर न अष्टमी की जगह नवमी को विशेष पूजन है।
अष्टमी भी लोगो के द्वारा पंचमी की तरह विशेष रूप से मनाई जाती है।
नवमी पूजन
नवमी के दिन नवरात्रि का आखरी दिन होता है जिसके घर मे अष्टमी की विशेष पूजा नही होती वह नवमी के दिन मातारानी की विशेष पूजा करते है।
नवमी और अष्टमी के दिन लोगो के घरों में कन्या भोज का आयोजन किया जाता है जिसमे पड़ोस की सभी कन्याओ की आमंत्रित करके भोजन कराया जाता है।
इन कन्याओ को देवी का रूप माना जाता है।
हिन्दू धर्म मे सबसे अच्छी बात यही होती है कि वह सभी भी धर्म या जाति की कन्या को भोजन करते है और उनको देवी का रूप मानते है।
धर्म और जाति के आधार पर वह किसी को कन्या भोज में भेदभाव नही करते है।
प्रतिमा विषर्जन और दशहरा
जैसा ही हम सब जानते है नवरात्रि को सिर्फ 9 दिन मनाया जाता है और दसवे दिन देवी की प्रतिमा का विषर्जन किया जाता है और रावण के पुतले का दहन किया जाता है।
प्रतिमा विषर्जन भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि माँ अपने घर वापिस जा रही है और अगले वर्ष फिरसे हमारे बीच आएगी।
रावण के पुतले दहन करना इस बात का प्रतीक है कि बुराई और दुष्कर्म कभी सच्चाई और अच्छे कर्मो पर विजय प्राप्त नही कर सकता है।
आठ हमे हमेशा सच्चाई का साथ देकर अच्छे कर्मों के साथ जीवन यापन करने चाहिए।
लंका विजय पश्चात जब भगवान राम अयोध्य्या वापिस पहुच जाते है उनके स्वागत में नगर वासियों ने उनका दीपो को जलाकर स्वागत किया था उस दिन दीवाली मनाई जाती हैं।
नवरात्रि में क्या करना चाहिए
  1. सुबह जल्दी से उठकर स्नान करना चाहिए।
  2. माता रानी के जलाभिषेक और पुष्पार्पण के लिए मंदिर जाना चाहिए।
  3. माँ दुर्गा के पूजन के बाद ही दुर्गा पाठ करना चाहिए।
  4. माता के पूजन के बाद ही कोई अन्य कार्य करें।
  5. सुबह का भोजन स्नान करके तैयार करना चाहिए।
  6. जितना संभव हो सके गरीबो को दान करना चाहिए।
  7. शाम को माँ दुर्गा की आरती में जरूर शामिल होना चाहिए।
  8. कन्या भोजन करवाना चाहिए।

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