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Sunday, 30 September 2018

गाँधी जयंती पर निबंध – Gandhi Jayanti Essay in Hindi 2018





गाँधी जयंती पर निबंध – Gandhi Jayanti Essay in Hindi 2018

महात्मा गाँधी का जन्मदिन भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यकर्मो में से एक हैं। 2 अक्टूबर को गाँधी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। गाँधी जी के जीवन को समझने के लिए हम यहाँ सरल और आसान भाषा में गाँधी जंयती निबंध शेयर कर रहे हैं। विद्यार्थी इनका प्रयोग स्कूल, कॉलेज में होने वाली प्रतियोगिता, निबंध लेखन में और विभिन्न अवसरों पर कर सकते हैं।


गाँधी जयंती निबंध – Gandhi Jayanti Essay in Hindi

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महात्मा गांधी जयंती पर निबंध – Essay On Mahatma Gandhi Jayanti

महात्मा गाँधी जयंती 2 अक्टूबर को भारत भर में एक राष्ट्रिय कार्यक्रम के रूप में मनायी जाती है। इस दिन को दुनिया भर में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। आजादी के लिए भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी ने अथक और निस्संदेह योगदान दिया। महात्मा गाँधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। सच्चाई और अहिंसा के माध्यम से उन्होंने अंग्रेजों से भारत की आजादी के लिए रास्ता पक्का किया।


महात्मा गाँधी को राष्ट्र के पिता के रूप में बुलाया गया। हम उन्हें बापू भी कहते है। वह ने केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए आशा का केंद्र था। महात्मा गाँधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बल्कि उनकी प्रतीकात्मक दृष्टि ने दुनिया भर के लोगों को किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।


गाँधी जी का सबसे प्रेरणादायक उद्धरण “खुद को जानना है तो दूसरों की सेवा में डूब जाओ।” जो उनके महत्वपूर्ण निस्वार्थ योगदान को दर्शाता है। महापुरुष मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू परिवार (माता-पिता करमचंद गांधी और पुतलीबाई) में हुआ था।


गांधीजी सच्चाई और अहिंसक के अग्रदूत थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत को आजादी दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांधी जी दुनिया को यह साबित कर दिखाया की अहिंसा के मार्ग से स्वतंत्रता हासिल की जा सकती हैं।

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गाँधी जयंती पर निबंध – Essay on Gandhi Jayanti in Hindi

महात्मा गांधी जी को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। उनका परिचय देना सूर्य को दिया दिखाने जैसा है। वे हमारे देश के उन महापुरुषों में से एक थे जिन्होंने राष्ट्रीय जीवन का एक नया इतिहास तैयार किया। हमारी आजादी और भारत की स्वतंत्रता उन्हीं की देन है।


महापुरुष महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईस्वी को गुजरात के पोरबंदर नामक शहर में हुआ था। गांधी के पिता करमचंद गाँधी राजकोट रियासत के दीवान थे। उनकी माता पुतलीबाई ने उनका लालन-पालन बड़े ही अच्छे ढंग से किया था। गाँधी का असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। आगे चलकर वे गांधीजी नाम से प्रसिद्ध हुए और आज हम उन्हें राष्ट्र के पिता और बापू कहते हैं।


गांधी जी ने अपनी पढ़ाई की शुरुवात गाँव के एक विद्यालय से की। एक समय ऐसा भी था जब गांधी जी नशा करना, चोरी करना, मांस खाने जैसी बुरी आदतों के आदि थे लेकिन आगे चलकर उन्होंने इन सभी आदतों को त्याग दिया।


एक बार गांधीजी किसी मुकदमे के चलते दक्षिण अफ्रीका गए थे वहां उन्हें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। गांधी ने देखा की वहा


एक बार गांधीजी किसी मुकदमे के चलते दक्षिण अफ्रीका गए थे वहां उन्हें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। गांधी ने देखा की वहां भारतियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा था। जिससे गाँधी जी बड़ी ठेस पहुंची। बापू जी वहां “सत्याग्रह” शुरू किया जिसमें उन्हें सफलता भी मिली।


महात्मा गाँधी जी सन 1914 में भारत आए तो उन्होंने देश की गरीबी और गुलामी देखी। अंग्रेजों के अत्याचार और उनका क्रूर शासन देखा। गांधीजी ने उस टाइम देशसेवा की ठान ली और अपने देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में जुट गये।


सन 1917 वे अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध करने लग गए। गांधी जी अंग्रेजों के खिलाफ चंपारण में पहला सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया। जनता ने उनका साथ दिया और उनका स्वागत किया। सन 1942 की महान क्रांति हुयी, गाँधी के करो या मरो नारे से सारा देश जागरूक हो गया। इस नारे गांधीजी के साथ बहुत से नेता अंग्रेजों ने जेलों में बंद कर दिये।


लेकिन फिर भी गांधीजी से प्रेरित जनता रूकी नहीं और अंग्रेजों के सामने झुकी नहीं। उनके संघर्ष से हारकर अंत में अंग्रेजों को 15 अगस्त 1947 ईस्वी को भारत को आजाद करके भारत छोड़कर भागना पड़ा।

देश को आजाद कराने वाले राष्ट्रपिता बापू जी को देश के ही एक व्यक्ति नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को पिस्तौल चलाकर मार डाला। लेकिन गांधीजी की जय आज भी हमारे प्राणों में नया जोश और उत्साह भरती है।


वे मरकर भी अमर है।
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महात्मा गाँधी जयंती पर निबंध इन हिंदी – Gandhi Jayanti Hindi Essay 2018

गाँधी जयंती भारत में तीन सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं में से एक है। यह त्योहार पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है ताकि हमारे राष्ट्र के पिता के जन्मदिन को याद किया जा सके। गाँधी जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी जी को सम्मान देना है जिन्होंने हमें ब्रिटिश शासन से आजादी दिलायी।


इस दिन को अहिंसा का अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में भी जाना जाता है। 2 अक्टूबर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। इस दिन सभी शैक्षणिक संस्थान, बैंक और कंपनियां आदि बंद रहती है। साथ ही इस दिन अल्कोहल बेचने जैसे सभी बुरी गतिविधियां सख्ती से प्रतिबंधित है क्योंकि बापू जी इन चीजों के सख्त खिलाफ थे।


गाँधी जयंती के दौरान स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में प्रार्थना, नाटक और भाषण पाठ सहित गतिविधियाँ आयोजित की जाती है। विभिन्न स्थानों पर गाँधी जयंती भाषण और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ कलाकारों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं।


गाँधी जयंती पर पर सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, और कॉलेजों को गाँधी जयंती फोटो और छवि से सजाया जाता है। सबसे पहले श्मशान स्थान को माला और फूलों से सजाया जाता है। उसके बाद पुष्पांजलि देकर हमारे महान नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उसके बाद बापू जी का पसंदीदा भजन गाया जाता है।


गाँधी जी के अनुसार, आजादी पाने के लिए सिर्फ सच्चाई और अहिंसा ही एकमात्र साधन है। वह कई बार जेल गए। महात्मा गाँधी सामाज में सबको समान मानते थे और अस्पृश्यता के खिलाफ थे। गाँधी अब युवाओं के लिए एक आदर्श मॉडल और प्रेरणादायक नेता बन गए है। नेल्सन मंडेला जैसे महान नेताओं ने स्वतंत्रता के लिए गाँधी के अहिंसा के सिद्धांत की प्रशंसा की।


स्वराज को हासिल करने के लिए गाँधी जी बहुत अच्छा काम किया। उन्होंने किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया और अस्पृश्यता जैसे अन्य सामाजिक बुराइयों को भी खत्म किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण का भी समर्थन किया। गाँधी ने असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे विभिन्न आंदोलनों का नेतृत्व किया। ये सभी आंदोलन सफल हुए थे और युवाओं ने इनमें अहम साथ दिया।

गाँधी जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य महात्मा गाँधी जी को सम्मान देने और लोगों को गांधी के सिद्धांतों को वितरित करने और विचारों और मान्यताओं के चरणों का पालन करने के लिए जागरूक करना है। इस तरह हम हर साल हमारे राष्ट्र के पिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


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गाँधी जयंती पर निबंध (500 शब्दों में) – Gandhi Jayanti Essay in 500 Words


भारत में कुछ व्यक्ति ऐसे हुए है जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता है और किसी अन्य व्यक्ति के साथ इनकी तुलना कभी नहीं की जा सकती है। उन्हीं में से एक थे महात्मा गाँधी, जिन्हें हम राष्ट्र के पिता या बापू भी कहते है। वह एक महापुरुष थे जिन्होंने हमारे देश को सच्चाई और अहिंसा के अपने तरीके से ब्रिटिश शासन से मुक्त करवाया।

भारत में हमारे राष्ट्र के पिता महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनके जन्मदिन 2 अक्टूबर को हर साल गाँधी जयंती के रूप मनाया जाता है।

मोहनदास करमचंद गांधी महात्मा गाँधी का मूल नाम था। उनका जन्म 2 October 1869 को गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था जो राजनीतिक व्यक्ति भी थे। उनकी माँ का नाम पुतलीबाई था वह एक धार्मिक महिला थी। 13 साल की उम्र में उन्होंने कस्तूरबा गाँधी से विवाह किया।


बचपन से ही वह बहुत ईमानदार और सच्चा प्रेमी था। उन्होंने लंदन से कानून की पढ़ाई पूरी की और दक्षिण अफ्रीका से अभ्यास पूरा किया। दक्षिण अफ्रिक में 1893 से 1914 तक गाँधी ने एक वकील और सार्वजनिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया। दक्षिण अफ्रीका में उन्हें रंगीन लोगों का सामना करना पड़ा।


एक बार उन्हें पीटरमैरिट्जबर्ग में एक ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया क्योंकि उन्हें प्रथम श्रेणी के डिब्बे से स्थानांतरित करने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने इस अधिनियम के खिलाफ विरोध किया और अगले दिन उन्हें प्रथम डिब्बे में आने-जाने की अनुमति मिल गयी।


दक्षिण अफ्रीका में गाँधी के साथ ऐसी कई घटनाएं घटी और फिर उन्होंने भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए वहां रहने वाले अन्य भारतीयों के लिए अपना समय बढ़ाने का फैसला किया।


1915 में गाँधी जी गोपाल कृष्ण गोखले (कॉग्रेस पार्टी के नेता) के अनुरोध पर भारत लौट आये। गाँधी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और 1920 में नेतृत्व संभाला। गाँधी ने गैर हिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर ब्रिटिश शासन से अपने देश को आजाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।


वह सच्चाई, शांति, अहिंसा का महान समर्थक था। साथ ही हमारे लिए सरल जीवन और बड़ी सोच का महान उदाहारण था। भारत की आजादी के लिए ब्रिटिशों के साथ अपने युद्ध के दौरान उन्होंने 1930 में सत्याग्रह आंदोलन जैसे विभिन्न नामों के साथ विभिन विरोधों को लागू किया।


1942 में उन्होंने अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया जिसको अंग्रेजों ने बंद करने की बहुत कोशिश की। जिसकी वजह से अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को गोलियां मारी, गिरफ्तार किया गया। भारतीयों के लिए भारत छोड़ो आंदोलन सबसे असरदार और मजबूत रहा।


उसके बाद गाँधी जी ने भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की मांग करने के लिए “करो या मरो” नारा दिया। आखिर में 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिस साम्राज्य को भारत में अपना शासन समाप्त करना पड़ा।


30 जनवरी 1948 को महात्मा गाँधी जी की हत्या कर दी गयी। एक हिंदू राष्ट्रवादी नाथू राम गोडसे ने बापू जी की छाती में तीन गोलियां दागी और पुरे देश में दुःख और अँधेरा फैलाया। 15 नवम्बर को नाथूराम और उसके साथी नारायण आप्टे को फांसी दे दी गयी।


गांधी जयंती कहाँ और कैसे मनाते है?

हर साल 2 अक्टूबर को देश भर में हमारे महात्मा गाँधी जी के जन्मदिन का पुरे देश में बड़े उत्साह के साथ गाँधी जयंती के रूप में जश्न मनाया जाता है। गाँधी जयंती मुख्य रूप से दो जगहों पर मनाया जाता है एक वह जगह जहाँ पर महात्मा गाँधी की हत्या की गयी थी और दूसरी वहां जहाँ संस्कार (राजपाट, नई दिल्ली) किया गया था।


महात्मा गाँधी की प्रतिमाओं पर फूलों की माला रखी जाती है है और बापू जी का पसंदीदा गीत “रघुपति राघव राजा राम” गाया जाता है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ नई दिल्ली में महात्मा गाँधी की समाधि राजघाट में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


मोहनदास करमचंद गाँधी हमारे देश के राष्ट्रपिता एक महान व्यक्ति थे। देश के लिए उनके बलिदान को हम कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने सत्य के राह पर अपना जीवन कुर्बान कर दिया हैं। हमारी आने वाली पीढ़ी भी उनके इस कार्य को याद करेंगी।





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